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दिल्ली ब्लास्ट में बड़ा खुलासा, सुसाइड बॉम्बर और साथियों में कड़ा मतभेद…

Delhi Bomb Blast

दिल्ली बम धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अफ़सरों को एक ऐसा पहलू मिला है जिसने पूरे टेरर मॉड्यूल की असल तस्वीर साफ कर दी है। आतंकी उमर-उन-नबी, जिसे इस ऑपरेशन का सबसे कट्टर (Most Radicalised) चेहरा बताया जा रहा है, अपने ही साथियों से गहरे मतभेदों के चलते अलग-थलग पड़ गया था। विचारधारा से लेकर पैसों तक, और ब्लास्ट के तरीके से लेकर संगठन की दिशा तक—इस गुट में फूट बहुत पहले से शुरू हो चुकी थी।

जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि उमर ISIS की विचारधारा से प्रभावित था, जबकि बाकी सदस्य अल-कायदा समर्थित ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ से जुड़ाव रखते थे। दोनों ही कट्टर संगठनों की सोच भले ही सलाफिज्म और हिंसक जिहाद से निकली हो, लेकिन लक्ष्य, रणनीति और दुनिया को देखने का नजरिया बिल्कुल अलग था।

मतभेद इतने बढ़ गए कि उमर ने अपने साथी अदील अहमद राथर की शादी में जाने से भी मना कर दिया था। फिर भी, मॉड्यूल को एक साथ मिलकर धमाकों की योजना बनानी थी। इसलिए वह अक्टूबर में काजीगुंड गया और अस्थायी रूप से सुलह की। उमर जोर देता था कि हमला बेहद नाटकीय और बड़े पैमाने पर होना चाहिए—यही उसकी सोच में सबसे बड़ा अंतर था। इस आतंकी गुट ने कुल 26 लाख रुपये इकट्ठा किए थे, लेकिन खर्चों के बारीक हिसाब को लेकर सबसे ज्यादा टकराव हुआ।

  • अदील अहमद राथर – ₹8 लाख
  • मुजफ्फर अहमद राथर – ₹6 लाख (भारत से भागने का शक)
  • शाहीन सईद – ₹5 लाख
  • मुज्जमिल शकील – ₹5 लाख
  • उमर – ₹2 लाख

जब उमर से पूरी लेखा-जोखा देने के लिए दबाव बनाया गया, तो वह झगड़ा और बढ़ गया। यह विवाद ही गुट के टूटने की असली वजहों में से एक था।

जांच में बड़ा संकेत

जांच एजेंसियों के अनुसार मॉड्यूल की योजना एक साथ कई जगह धमाके (Coordinated Blasts) करने की थी।
उमर की कट्टरपंथी सोच इस प्लान को और खतरनाक दिशा में ले जा रही थी — और यही उसे बाकी साथियों से अलग कर रहा था।



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