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राजस्थान में नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद साफ हो गया कि दोनों मुख्य पार्टी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है उसी तरफ कांग्रेस ने 199 सीटों पर अपने उम्मीदवार उठा रहे हैं और बीजेपी ने 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
बात करें भाजपा से हुए बागी नेताओं की तो उनकी संख्या 19 हैं। 19 में से पांच पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। झोटवाड़ा राजपाल सिंह, डीडवाना से यूनुस खान, कमा से मदन मोहन, खंडेला से बंशीधर, शाहपुरा भीलवाड़ा से कैलाश मेघवाल और चित्तौड़गढ़ से तत्कालीन विधायक चंद्रभान सिंह। यह थे वह पांच पूर्व मंत्री। साथी पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रविंद्र सिंह भाटी भी 7 दिन तक भाजपा में रहे पर अब उन्होंने शिव विधानसभा से निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है और चुनाव लड़ने का मन भी बना लिया है।
अब बात करते है कांग्रेस की, तो कांग्रेस की भाग संख्या भाजपा से कम है। कांग्रेस की बाकी संख्या 16 है। जिसमें बीकानेर की लूणकरणसर विधानसभा से वीरेंद्र बेनीवाल, नागोर से हबीबूरहमान, शाहपुरा से आलोक बेनीवाल बागी है। साथ ही इस और बीकानेर पश्चिम से फिफ्थ कल्याण बोर्ड के सदस्य राजकुमार किराडू ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है। वह काफी समय से बीकानेर पश्चिम से अपनी दावेदारी कर रहे थे, पर कांग्रेस ने दसवीं बार तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ बी डी कल्ला को अपना उम्मीदवार घोषित किया। सूरसागर से रामेश्वर दाधीच पूर्व मेयर जोधपुर।
रामेश्वर दाधीच चार दशकों से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की काफी करीब भी माने जाते हैं। और वह इस बार उम्मीद थी कि सूरसागर से उन्हें कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया जाएगा, पर ऐसा नहीं हुआ कांग्रेस ने अयूब खान को अपना प्रत्याशी बनाया। वही बाकी बागो को बाकी नेता बनेंगे पर रामेश्वर दाधीच को खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मनाएंगे। क्योंकि यह कुछ बाकी ऐसे जो हार और जीत तय कर सकते हैं।
अब देखना होगा कि दोनों मुख्य पार्टियों कांग्रेस और भाजपा कैसे अपने बागी नेताओं को मानती है। क्या वह सफल होती है या असफल?















