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एक दिन, एक मुहूर्त और सैकड़ों शादियां। शहर का परकोटा बनेगा छत और शहरवासी बाराती। हर गली-मोहल्ले से निकलेगी बारातें। इतनी बड़ी संख्या में शादियां कि पूरे शहर के भवन भी कम पड़ेंगे। प्रत्येक दो साल बाद बीकानेर में होने वाले पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक विवाह (सावा) इस बार 18 फरवरी को होगा। इसमें देशभर के विभिन्न शहरों में रह रहे समाज के परिवार अपने लड़के-लडकियों की शादी करने अपनी मातृभूमि बीकानेर पहुंचने शुरू हो गए हैं। कम खर्च में अधिक शादियों के लिए प्रसिद्ध इस विवाह परम्परा की जड़ें इतनी गहरी हैं कि बीकानेर के जाये-जन्मे चाहे देश के किसी भी स्थान पर रहे, लेकिन विवाह के लिए उनकी जन्मभूमि ही वेडिंग डेस्टिनेशन है। समाज के परिवारों को इस सावे का इंतजार रहता है।
जानकारों के अनुसार यह परम्परा चार सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है। 18 फरवरी को एक दिन में बीकानेर में 300 से ज्यादा शादियां होंगी।















