Jal Jeevan Mission scam
राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में फंसे प्रदेश के पूर्व मंत्री महेश जोशी की कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जोशी समेत चार अन्य आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़ी फर्मों की कुल ₹47.80 करोड़ की संपत्तियां अटैच कर ली हैं।
ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों में जयपुर के विभिन्न हिस्सों में स्थित कृषि भूमि, आलीशान फ्लैट्स, मकान और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। इस मामले में जोशी के अलावा पदमचंद जैन, महेश मित्तल, संजय बड़ाया और विशाल सक्सेना के नाम भी शामिल हैं, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
जमानत याचिका खारिज
वहीं, शुक्रवार को जयपुर की पीएमएलए विशेष अदालत ने महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में जमानत देना उचित नहीं होगा। जोशी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कुछ जलदाय विभाग के अभियंताओं ने खुद रिश्वत लेने की बात कबूली है, फिर भी उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया। इस पर ईडी की ओर से दलील दी गई कि कई ठेकेदारों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है।
क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?
जल जीवन मिशन के तहत राज्यभर में पीने के पानी की पाइपलाइन बिछाने और जल आपूर्ति की योजनाओं में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। ठेकेदारों, अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के टेंडर मनमानी से बांटे गए और कमीशनखोरी का बड़ा खेल खेला गया।
ED की लगातार कार्रवाई और कोर्ट की सख्ती से साफ है कि इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में अब और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर सरकारी तंत्र तक, सभी की निगाहें अब इस केस की आगामी जांच और संभावित गिरफ्तारियों पर टिकी हैं।
















