Rajasthan Politics Today
राजस्थान में भाजपा सरकार को डेढ़ साल होने को है, लेकिन अब तक ना तो मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और ना ही फेरबदल की कोई घोषणा। छह सीटें अब भी खाली हैं, जिससे सियासी चर्चाएं गर्म हैं। पार्टी के अंदरखाने से जो संकेत मिल रहे हैं। वे साफ इशारा करते हैं कि अब सबकुछ भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद ही तय होगा।
क्या है देरी की असली वजह?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि, राजस्थान के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भी मंत्रिमंडल विस्तार का मामला लटका हुआ है। और इस देरी के पीछे मुख्य वजह है — नेतृत्व का संतुलन साधना। किसे संगठन में भेजा जाए और किसे सरकार में रखा जाए, यह फैसला नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ही होगा।
परफॉर्मेंस कार्ड’ से तय होंगे मंत्री के विभाग
आलाकमान ने परफॉर्मेंस के आधार पर मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक जिन मंत्रियों का प्रदर्शन औसत या कमजोर पाया गया है। उन्हें हटाया भी जा सकता है। वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वालों का कद और बढ़ सकता है।
जातीय समीकरणों पर भी नजर
वर्तमान में राज्य मंत्रिमंडल में छह सीटें खाली हैं और कुछ ही महीनों में प्रदेश में निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में भाजपा का प्रयास होगा कि नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सामाजिक संतुलन साधा जा सके।
यदि जुलाई में कोई फैसला नहीं हुआ तो संभावना है कि यह मामला फिर लंबा खिंच सकता है, क्योंकि अगस्त-सितंबर से बिहार चुनावी माहौल में पार्टी की प्राथमिकताएं बदल जाएंगी।
















