Rajasthan SDM Slap Case
देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के चर्चित मामले में नाटकीय मोड़ आया है। राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस प्रकरण में टोंक की एससी-एसटी कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस उमाशंकर व्यास ने याचिकाकर्ता नरेश मीणा की ओर से दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
हत्या के प्रयास नहीं, साधारण मारपीट है मामला: याचिका में दावा
नरेश मीणा की पैरवी कर रहे एडवोकेट फतेह राम मीणा और रजनीश गुप्ता ने अदालत में जोर देकर कहा कि यह मामला हत्या के प्रयास का नहीं, बल्कि साधारण मारपीट का है। वकीलों ने सीसीटीवी फुटेज और मौके की रिकॉर्डिंग के आधार पर दावा किया कि एसडीएम के गले पर कोई जानलेवा हमला नहीं हुआ और मेडिकल रिपोर्ट में भी ऐसी चोट की पुष्टि नहीं है।
याचिका में कहा गया कि घटना के वक्त मतदान केंद्र पर निर्वाचन आयोग के कैमरे और तहसीलदार के मोबाइल से रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि आरोप बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) — जो हत्या के प्रयास से जुड़ी है — के तहत चालान पेश किया था। निचली अदालत ने भी इसी आधार पर चार्ज फ्रेम कर दिए। लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए कार्यवाही पर रोक लगाई और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।


















