Bikaner PBM Hospital
बीकानेर संभाग का सबसे बड़ा पीबीएम अस्पताल जो जीवन की किरण माना जाता है, आज खुद एक उपेक्षा का शिकार है। अस्पताल की लिफ्ट महीनों से खराब है और रैंप भी पिछले एक महीने से बंद पड़ा है। इस कारण प्रथम तल पर भर्ती मरीजों को सीढ़ियों के सहारे खींच-खींच कर ले जाया जा रहा है — कभी गोद में, तो कभी स्ट्रेचर को 4 लोगों से उठवा कर।
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मरीजों को ले जाते परिजनों की आंखों में आंसू, कंधों पर दर्द और दिल में गुस्सा साफ देखा जा सकता है। कई मामलों में जांच के रास्ते में ही मरीजों की हालत बिगड़ रही है। अस्पताल प्रशासन की यह बेरुखी हर दिन इंसानियत को शर्मसार कर रही है।
भाजपा नेता वेद व्यास ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा–
“ट्रोमा सेंटर में जो हो रहा है वह शर्मनाक है। ये हालात साफ दर्शाते हैं कि अस्पताल का प्रशासन सिर्फ कागज़ों पर काम कर रही है। आम मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालकर इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मैं प्रशासन से मांग करता हूं कि लिफ्ट व रैंप की मरम्मत को तुरंत प्राथमिकता में लिया जाए, वरना हम सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।”
वहीं, फूले ब्रिगेड बीकानेर जिलाध्यक्ष भेरूदान तंवर ने पीबीएम प्रशासन से किए सवाल–
- क्या बीकानेर के ट्रोमा सेंटर में इलाज पाने के लिए जंग लड़ना जरूरी है?
- क्या एक सरकारी अस्पताल की ये दुर्दशा इंसानियत पर सवाल नहीं उठाती?














