Bikaner Underpass Controversy
बीकानेर कोटगेट और सांखला फाटक क्षेत्र में प्रस्तावित अंडरपास परियोजना शुरू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा 36 भवनों के अधिग्रहण को लेकर जारी नोटिसों के बाद पूरे क्षेत्र में गहमागहमी और विरोध का माहौल बन गया है।
किरायेदार व्यापारी सबसे बड़ी चिंता में
इस परियोजना से सबसे अधिक प्रभावित वे व्यापारी हैं जो वर्षों से किराए पर दुकानें चला रहे हैं। नोटिस के अनुसार मुआवजा केवल भवन मालिक को दिया जाएगा, जबकि दशकों से वहां व्यापार कर रहे किरायेदारों के लिए कोई पुनर्वास योजना नहीं बनाई गई है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका पर तलवार लटक रही है।
छोटे-छोटे हिस्सों का अधिग्रहण, बड़ी इमारतों की स्थिरता पर सवाल
BDA द्वारा आंशिक अधिग्रहण की नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई बहुमंजिला इमारतों के पीछे या साइड हिस्से को अधिग्रहित किया जा रहा है। जिससे पूरी बिल्डिंग की उपयोगिता खत्म हो जाएगी। उदाहरण के तौर पर पेंटर भोजराज सोलंकी की दुकानों का पिछला हिस्सा लिए जाने की स्थिति में पूरी दुकान ही बेकार हो जाएगी।
सीवरेज लाइन और तकनीकी चुनौतियाँ बढ़ा रहीं मुश्किलें
सांखला फाटक और मटका गली क्षेत्र में प्रस्तावित अंडरपास की राह में तकनीकी समस्याएं भी कम नहीं हैं। मटका गली में करीब 15 फीट गहरी सीवरेज लाइन के बिल्कुल पास खुदाई प्रस्तावित है, जो तकनीकी रूप से खतरनाक मानी जा रही है। बीकानेर भुजिया भंडार के सामने जहां यह अंडरपास खुलेगा, वहां हाल ही में बना सीवर चैंबर निर्माण एजेंसी के लिए नई चुनौती खड़ी कर रहा है।
“आंशिक अधिग्रहण” बना दुकानदारों की नींद उड़ाने वाला मुद्दा
भोज प्रिंटिंग वर्क्स, चिरंजीलाल श्रीमाली, उर्मिला आसोपा सहित कई दुकानदारों की बिल्डिंग्स का केवल एक हिस्सा लिए जाने से बाकी ढांचा कमजोर या अनुपयोगी हो जाएगा। इस तरह की अधूरी योजनाएं स्थानीय व्यवसायियों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती हैं। काली माई होटल और डिस्पोजल की दुकानों सहित आसपास के दुकानदारों की मांग है कि अधिग्रहण के बाद उन्हें नजदीकी क्षेत्र में वैकल्पिक दुकानें दी जाएं। वे चाहते हैं कि सरकार सिर्फ मुआवजे तक सीमित न रहे, बल्कि उन्हें पुनर्स्थापित कर रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करे।















