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बीकानेर का गढ़ गणेश मंदिर, 530 साल से चली आ रही परंपरा, जानें क्यों खास है यहां का गणेश चतुर्थी उत्सव…

Bikaner Garh Ganesh Temple

गणेश चतुर्थी के अवसर पर बीकानेर का ऐतिहासिक गढ़ गणेश मंदिर आज भी उतना ही खास माना जाता है। जितना करीब 530 साल पहले इसकी स्थापना के समय था।

कहा जाता है कि– जब राव बीका ने बीकानेर शहर की नींव रखी, तो सबसे पहले उन्होंने वर्तमान लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास अपना गढ़ बसाया। यहीं पर उन्होंने भगवान गणेश की स्थापना की और यही मंदिर आज गढ़ गणेश कहलाता है। बाद में राजपरिवार जूनागढ़ महल में रहने लगा, तो वहां भी गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई, जिसे लोग दूसरा गढ़ गणेश मंदिर कहते हैं। आज भी शहरवासी इन दोनों मंदिरों को लेकर अपनी आस्था बनाए हुए हैं।

गणेश चतुर्थी पर सुबह 4 बजे से ही मंदिरों में पंचामृत अभिषेक शुरू हो गया। लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर स्थित गढ़ गणेश में भव्य सजावट की गई है और दोपहर 12 बजे भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

मंदिर के पुजारी गणेश सेवग के अनुसार – यह वही स्थान है जहां कभी राव बीका रहते थे और यहीं से बीकानेर का इतिहास शुरू हुआ। बीकानेर राजपरिवार हर शुभ अवसर पर यहां दर्शन करने जरूर आता था। चाहे त्यौहार हो, युद्ध हो या लोकतंत्र में चुनाव – आशीर्वाद लेना परंपरा रही है। लगभग 20 फीट ऊँचे मंदिर के गेट की खासियत है कि इसे लकड़ी से बनाया गया है और बीच में लोहे की पत्तियों से मजबूती दी गई है। गेट के ऊपर पत्थरों पर बारीक नक्काशी आज भी उस दौर की राजशाही झलक दिखाती है।

आज गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है। गणेश प्रतिमा के साथ-साथ मंदिर में स्थित सभी देव प्रतिमाओं की विशेष पूजा की जा रही है।


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