🟡 RSS 100 Years Celebration
विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस वर्ष अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है। संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन, वर्ष 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा नागपुर में हुई थी। यही कारण है कि दशहरा और RSS का गहरा संबंध माना जाता है। इस वर्ष दशहरे के अवसर पर संघ का शताब्दी वर्ष आरंभ हो रहा है, जो पूरे देशभर में उत्साह और गौरव का विषय है।

RSS का 100 वर्षों का सफर
पिछले एक शतक में संघ ने राष्ट्र सेवा, सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण में अमूल्य योगदान दिया है। आज संघ के स्वयंसेवक न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

विजयादशमी का महत्व
RSS के अनुसार विजयादशमी का पर्व सत्य पर असत्य की विजय, धर्म पर अधर्म की विजय का प्रतीक है। संघ हर वर्ष इसी दिन अपना स्थापना दिवस मनाता है। इस बार जब संघ 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तो यह पर्व और भी विशेष हो गया है।

देशभर में आयोजन
संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में पथ संचलन, ध्वज वंदन, व्याख्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बीकानेर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में भी स्वयंसेवक विजयादशमी उत्सव में शामिल होंगे।

राष्ट्र सेवा की नई ऊर्जा
संघ का कहना है कि शताब्दी वर्ष केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले 100 वर्षों के लिए नई ऊर्जा और संकल्प लेने का समय है। आज जब दुनिया भारत की ओर उम्मीद से देख रही है, तब RSS का “संघे शक्ति: कलौ युगे” का मंत्र और भी प्रासंगिक हो जाता है।


















