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राजस्थान विधानसभा में शोर-शराबा, सरकार और विपक्ष भिड़े…

🔴 Rajasthan Assembly

राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल में बुधवार को अदालतों के गठन और लंबित मुकदमों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। मुद्दा तब और गरमा गया जब कांग्रेस विधायक सुरेश गुर्जर ने झालावाड़ जिले के खानपुर में पिछले 9 वर्षों से लंबित ACJM कोर्ट के प्रस्ताव को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और विधि मंत्री जोगाराम पटेल के बीच आंकड़ों को लेकर जोरदार तकरार हुई, जिससे सदन में काफी देर तक शोर-शराबा रहा।

विधायक सुरेश गुर्जर ने सदन को बताया कि खानपुर में ACJM कोर्ट खोलने का प्रस्ताव 8 दिसंबर 2014 से लंबित है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिविल और आपराधिक मामलों के 4700 से अधिक मुकदमे पेंडिंग हैं, जिससे आमजन को न्याय के लिए दूर-दराज भटकना पड़ रहा है।गुर्जर ने यह भी रेखांकित किया कि कोर्ट भवन पूरी तरह बनकर तैयार है, लेकिन प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिलने के कारण आज भी उस पर ताले लटके हुए हैं। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या आगामी बजट में खानपुर कोर्ट खोलने की घोषणा की जाएगी या नहीं?

विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने स्वीकार किया कि यह प्रस्ताव काफी पुराना है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कई बार हाईकोर्ट को रिस्पांस और रिक्वेस्ट भेजी जा चुकी है, लेकिन अंतिम स्वीकृति उच्च न्यायालय से अभी लंबित है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार एक बार फिर हाईकोर्ट से विशेष आग्रह करेगी, ताकि खानपुर के लोगों को जल्द न्यायिक सुविधा मिल सके।

जब विपक्ष ने पिछले दो वर्षों में स्वीकृत कोर्ट प्रस्तावों का ब्यौरा मांगा, तो विधि मंत्री ने इसे एक “सतत प्रक्रिया” बताया। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार और वर्तमान सरकार की तुलना करते हुए कहा—

  • वर्तमान सरकार ने 9 जिला एवं सत्र न्यायालय (DJ कोर्ट) खोले
  • कांग्रेस सरकार ने केवल 1 ACB कोर्ट खोला, जबकि मौजूदा सरकार ने 7 ACB कोर्ट खोले
  • कांग्रेस के कार्यकाल में 1 CJM कोर्ट, जबकि वर्तमान सरकार ने 8 CJM कोर्ट शुरू किए


मंत्री ने दावा किया कि “नेता प्रतिपक्ष कल्पना करें, यह सरकार 5 वर्षों में न्यायिक इतिहास रचेगी।”

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार के जवाब को “बहानेबाजी” करार दिया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सरकारें बजट या मुकदमों की कमी का तर्क देती हैं, लेकिन खानपुर मामले में बिल्डिंग तैयार है, मुकदमे पर्याप्त हैं और रजिस्ट्रार जोधपुर से प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। जूली ने सवाल उठाया कि जब सभी औपचारिकताएं पूरी हैं, तो सरकार कोर्ट खोलने की घोषणा से क्यों बच रही है? इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

बहस के अंत में विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार की प्राथमिकता “सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय” है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब अदालतों में आने वाले नए मामलों से अधिक पुराने मामलों का निपटारा किया जा रहा है।



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