🟡 Rajasthan Khejri Conservation Act, राजस्थान खेजड़ी संरक्षण कानून
राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए अब राज्य सरकार सख्त कानून लाने की तैयारी में है। Bhajanlal Sharma सरकार ने वृक्ष संरक्षण अधिनियम का प्रारूप तैयार करने के लिए 6 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह फैसला विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद लिया गया है। मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्षता कानून मंत्री Jogaram Patel करेंगे। समिति एक महीने के भीतर कानून का ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
सरकार द्वारा गठित इस समिति में कई मंत्री और विधि विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति के सदस्य इस प्रकार हैं:
- Jogaram Patel – अध्यक्ष
- Hemant Meena – सदस्य
- Sanjay Sharma – सदस्य
- राघवेंद्र काछवाल – प्रमुख शासन सचिव (विधि)
- महावीर विश्नोई – अतिरिक्त महाधिवक्ता
- कुणाल विश्नोई – अधिवक्ता, Rajasthan High Court
समिति का प्रशासनिक विभाग राजस्व विभाग को बनाया गया है, जिसके शासन सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे।
समिति देश के अलग-अलग राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन करेगी। इसके साथ ही पर्यावरण विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स की राय भी ली जाएगी।
इसके अलावा वृक्ष संरक्षण से जुड़े न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों और मौजूदा प्रावधानों का अध्ययन करके एक व्यापक कानून का प्रारूप तैयार किया जाएगा।
वर्तमान में राजस्थान में केवल कृषि भूमि पर पेड़ काटने की अनुमति का प्रावधान काश्तकारी कानून में है। लेकिन नए प्रस्तावित कानून के तहत इन सभी भूमियों पर भी सख्त नियम लागू किए जाएंगे:
- आवंटित भूमि
- रूपांतरित भूमि
- अधिग्रहित भूमि
- आबादी भूमि
- अन्य गैर-कृषि उपयोग वाली जमीन
इन जमीनों पर पेड़ काटने से पहले प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा और केवल न्यूनतम आवश्यक पेड़ों को हटाने की ही अनुमति दी जाएगी।
दरअसल, Bikaner समेत मरुस्थलीय जिलों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए हजारों खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के आरोप लगे थे।
इसको लेकर संतों और पर्यावरण प्रेमियों ने आंदोलन शुरू किया था। बीकानेर में विश्नोई धर्मशाला के पास 11 दिनों तक महापड़ाव और अनशन चला। आंदोलन के बाद 12 फरवरी 2026 को सरकार और संतों के बीच वार्ता हुई, जिसके बाद राजस्व विभाग ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। अब सरकार स्थायी समाधान के तौर पर वृक्ष संरक्षण अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है, ताकि राज्य वृक्ष खेजड़ी और अन्य पेड़ों की अवैध कटाई को सख्ती से रोका जा सके।



















