🟡 Ghudle Festival Bikaner

बीकानेर शहर के नत्थूसर बास स्थित रामदेव पार्क के पास भाटोलाई तलाई में गवरजा माता के पावन उत्सव के तहत आयोजित इस वर्ष भी श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। प्राचीन लोकआस्था से जुड़ी घुड़ले घुमाने की परंपरा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया।
इस विशेष अवसर पर मोहल्ले की नौ बालिकाओं ने नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूप धारण कर आयोजन को दिव्यता प्रदान की। बालिकाओं ने मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के रूप में सुसज्जित होकर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक श्रृंगार और जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। ढोल-नगाड़ों और मंगल ध्वनियों के बीच “जय माता दी” के उद्घोषों के साथ बालिकाओं ने पूरे मोहल्ले में भ्रमण किया। घर-घर जाकर पारंपरिक घुड़ले के गीत गाए गए, जहां हर परिवार ने उनका स्वागत कर आस्था का परिचय दिया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
स्थानीय लोगों ने इस आयोजन को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त माध्यम बताते हुए बालिकाओं के उत्साह और समर्पण की सराहना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का प्रेरणादायक संदेश भी देता है। इस दौरान सामूहिक गीतों में चित्रा, आयुषी, संतोष, कोमल, प्रिंसी, वर्षा, संजना और मीनाक्षी सहित कई महिलाओं की सहभागिता रही, जिन्होंने आयोजन को और भी जीवंत बना दिया।














