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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को कोर्ट के फ़ैसले के बाद लाहौर स्थित उनके आवास ज़मान पार्क से गिरफ़्तार कर लिया गया है। इमरान ख़ान पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इस्लामाबाद के जिला और सत्र न्यायालय ने इमरान ख़ान को तोशाखाना मामले में दोषी पाते हुए उन्हें तीन साल जेल की सज़ा सुनाई है, साथ ही उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
पाकिस्तान चुनाव आयोग के वकील अमजद परवेज़ का कहना है कि, इस अदालत से सज़ा मिलने पर इमरान ख़ान अब पांच साल तक के लिए चुनावों में हिस्सा लेने के योग्य नहीं हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान में इमरान ख़ान के समर्थक एक बार फिर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
क्या है तोशाखाना मामला?
1974 में पाकिस्तान में तोशाखाना स्थापित किया गया। ये कैबिनेट डिवीज़न के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक सरकारी विभाग है जहां देश के प्रमुखों, मंत्रियों, नौकरशाहों, सासंदों को विदेशी सरकार या अधिकारियों की ओर से मिले मंहगे गिफ़्ट रखे जाते हैं। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या दूसरे बड़े अधिकारियों को किसी यात्रा के दौरान मिलने वाले क़ीमती तोहफों को रखा जाता है। अक्तूबर 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने तोशाखाना मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अगले पांच साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य क़रार दिया था।
चुनाव आयोग ने कहा था कि इमरान ख़ान ने सत्ता में रहते हुए तोशाखाना से जो तोहफ़े लिए थे, उसके बारे में अधिकारियों को उन्होंने सही जानकारी नहीं दी। इमरान ख़ान इन आरोपों को ग़लत बताते हैं। इमरान ख़ान पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए क़ीमती तोहफ़े अपने फ़ायदे के लिए बेचे। इमरान ख़ान ने चुनाव आयोग को दी गई अपनी संपत्ति की घोषणा में उसका ब्योरा नहीं दिया था।


















