🟡 PBM Hospital Bikaner
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल स्थित आचार्य तुलसी कैंसर विंग में एक बड़ी मेडिकल लापरवाही सामने आई है। यहां भर्ती 75 वर्षीय महिला मरीज भवरी देवी को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया, जिससे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। गनीमत रही कि समय रहते परिजन की सतर्कता से ट्रांसफ्यूजन रुकवाया गया और मरीज की जान बच सकी।
कैसे हुई चूक
जानकारी के अनुसार भवरी देवी को खून की कमी के चलते कैंसर विंग में भर्ती किया गया था। उनका ब्लड ग्रुप A+ है। पहले सही ब्लड की एक यूनिट चढ़ाई गई, लेकिन दूसरी यूनिट के लिए ब्लड बैंक से गलती से B+ ग्रुप का ब्लड दे दिया गया। नर्सिंग स्टाफ ने बिना क्रॉस चेक किए वही ब्लड मरीज को चढ़ा दिया।
जैसे ही गलत ब्लड चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई, करीब 30 सेकेंड में ही मरीज को घबराहट और बेचैनी होने लगी। उसी दौरान मौजूद परिजन की नजर ब्लड यूनिट पर लिखे ग्रुप पर पड़ी और उन्होंने तुरंत डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ को बुलाकर ट्रांसफ्यूजन रुकवाया।

एक ही नाम की दो मरीज, यहीं से हुई बड़ी भूल
कैंसर विंग में उसी समय भंवरी देवी नाम की दो महिला मरीज भर्ती थीं। दोनों के पति के नाम अलग-अलग थे और दोनों को ब्लड चढ़ाया जाना था। नर्सिंग स्टाफ ने मरीज की सही पहचान किए बिना दूसरी मरीज के लिए मंगवाया गया ब्लड पहली भंवरी देवी को चढ़ा दिया। पहचान प्रक्रिया में लापरवाही इस गंभीर घटना की मुख्य वजह मानी जा रही है।

प्रिंसिपल और HOD मौके पर पहुंचे
घटना की शिकायत मिलते ही सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा स्वयं कैंसर विंग पहुंचे। कैंसर विंग के एचओडी डॉ. सुरेंद्र बेनीवाल भी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही है।
प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि मरीज का हीमोग्लोबिन 4.4 ग्राम प्रतिशत था, जिस कारण ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जा रहा था। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भाजयुमो ने जताई नाराजगी
घटना के बाद भाजयुमो शहर अध्यक्ष वेद व्यास अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और इस लापरवाही पर नाराजगी जताई। उन्होंने पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। बाद में प्रिंसिपल के सामने भी लापरवाही को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई।
बड़ा सवाल
यह घटना पीबीएम जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि अगर परिजन समय पर सतर्क न होते तो एक निर्दोष मरीज की जान जा सकती थी।














