Rajasthan Religious Conversion News
राजस्थान के अलवर जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने एमआईए थाना क्षेत्र में चल रहे एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल पर छापा मारकर धर्मांतरण के खेल का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का लालच देकर यहां धीरे-धीरे उनकी धार्मिक मान्यताओं को बदला जा रहा था।
50 बच्चों पर धर्मांतरण का असर
हॉस्टल में कुल 50 बच्चे रह रहे थे, जिनमें 15 राजपूत, 15 सिख और 20 एससी समुदाय से थे। पुलिस का कहना है कि सभी बच्चों को बाइबल पढ़ाई जाती थी और रोजाना सुबह-शाम ईसाई प्रार्थना करवाई जाती थी। बच्चों ने पुलिस के सामने खुद स्वीकार किया कि अब वे भगवान को नहीं मानते, बल्कि यीशु को ही भगवान मानते हैं।
मास्टरमाइंड पहले भी पकड़ा जा चुका
अलवर एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि मुख्य आरोपी अमृत सिंह पहले खुद हिंदू था, लेकिन धर्म बदलने के बाद अब दूसरों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। अमृत सिंह को पहले भी सीकर पुलिस ने धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया था। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अलवर में यह हॉस्टल शुरू किया।
कैसे चल रहा था खेल?
- गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाई और रहने की सुविधा देकर हॉस्टल में रखा जाता था।
- बच्चों को दूसरे धर्मों की कमियां बताकर ईसाई धर्म की महानता समझाई जाती थी।
- परिवारों को आर्थिक मदद भी दी जाने की आशंका है।
- हॉस्टल से डिजिटल और प्रिंटेड धार्मिक सामग्री भी जब्त हुई है।
पैरेंट्स और बच्चों के बयान चौंकाने वाले
- राजेंद्र सिंह महरमपुर गांव ने बताया कि– उनका बेटा 2022 से इस हॉस्टल में रह रहा है। अब वह पूजा-पाठ बंद कर चुका है और केवल बाइबल पढ़ता है।
- हॉस्टल में पढ़ रहे एक अन्य बच्चे ने कहा कि– उसके दादा-दादी पहले से ही ईसाई धर्म मानते हैं।
- एक महिला अभिभावक ने कहा कि– वे हर साल 3 हजार रुपये फीस देते हैं और बच्चों को पढ़ाई के लिए खुशी-खुशी यहां भेजते हैं।
- पड़ोसियों का कहना है कि– यहां हर रविवार को कीर्तन और प्रार्थना होती है, लेकिन उनकी भाषा समझ नहीं आती।
एसपी सुधीर चौधरी ने कहा कि– यह मामला केवल अलवर तक सीमित नहीं है। ऐसे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। अमृत सिंह और उसके साथी सोनू रायसिख को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीकर में दर्ज केस में उसकी बेल कैंसिल कराई जाएगी।
















