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बीकानेर में न्याय की मिसाल – नगर निगम की लापरवाही पर कुर्की का आदेश…

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बीकानेर शहर में आवारा पशुओं की अनदेखी अब सरकारी जिम्मेदारों पर भारी पड़ने लगी है। 5 अगस्त 2019 को सांड के हमले में महिला की मौत के मामले में नगर निगम की लापरवाही अब कोर्ट की सख्ती का कारण बन गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नगर निगम आयुक्त कार्यालय का फर्नीचर कुर्क करने के आदेश दिए हैं क्योंकि 81200 रुपए का भुगतान मृतका के परिजनों को अब तक नहीं किया गया।

जाने पूरा मामला

मामला धन्नाराम की पत्नी संतोष देवी की मौत से जुड़ा है। जिन्हें गजनेर रोड स्थित कोठारी अस्पताल के पास आवारा सांड और गाय ने बुरी तरह से कुचल दिया था। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन 6 अगस्त 2019 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतका के पति ने स्थायी लोक अदालत में नगर निगम और सरकार के खिलाफ मामला दर्ज किया। अदालत ने 2 अगस्त 2023 को आदेश दिया कि नगर निगम 3 लाख रुपए मुआवजा एकमुश्त अदा करे, साथ ही 6% वार्षिक ब्याज, मानसिक संताप व मुकदमा खर्च मिलाकर कुल 3,81,200 रुपए चुकाए जाएं। हालांकि निगम ने 10 मार्च 2025 को 3,28,800 रुपए अदा किए, लेकिन 81,200 रुपए अभी तक बकाया हैं। इस राशि की वसूली के लिए इजराय प्रार्थना-पत्र दायर किया गया, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने नगर निगम के फर्नीचर कुर्क करने और 16 जुलाई तक पालन रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

आवारा सांड की लापरवाही, जिम्मेदार सिस्टम पर कार्रवाई

यह मामला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की संवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अब आवारा पशुओं की समस्या को नजरअंदाज करना सरकारी तंत्र को महंगा पड़ सकता है। नगर निगम की निष्क्रियता की यह बड़ी कीमत अब उसे कोर्ट के आदेश के रूप में चुकानी पड़ रही है।



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