🔴 Bikaner News Today
बीकानेर में पाम ऑयल और केमिकल से तैयार नकली घी की बढ़ती बिक्री ने आमजन की सेहत पर खतरा मंडरा दिया है। मार्केट में उपलब्ध मिलावटी घी और पानी मिले दूध ने लोगों की सेहत पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। इसी बीच उरमूल डेयरी की रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया है।
उरमूल डेयरी के प्रबंध निदेशक बाबूलाल बिश्नोई के अनुसार बीकानेर जिले में रोजाना करीब 10 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसमें से केवल सवा लाख लीटर उरमूल डेयरी में संकलित होता है।
उरमूल चार प्रकार का दूध तैयार करती है—टोंड, स्टैंडर्ड, डबल टोंड और काऊ मिल्क। इसके अलावा डेयरी द्वारा दही, पनीर, मावा, श्रीखंड और आउटसोर्सिंग के माध्यम से रसगुल्ला, गुलाबजामुन, सोनपापड़ी भी तैयार करवाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि 95% दूध गाय का होता है, जबकि लगभग 5% दूध में भैंस आदि का दूध होता है। डेयरी से करीब 25 हजार लीटर दूध जयपुर और 16 हजार लीटर बीकानेर शहर में प्रतिदिन आपूर्ति की जाती है। 35 लाख की हाई-टेक मिल्क टेस्टिंग मशीन, उपभोक्ता भी करवा सकते हैं मुफ्त जांच
उरमूल डेयरी के प्लांट मैनेजर ओमप्रकाश भांभू ने बताया कि डेयरी ने 35 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक मिल्क टेस्टिंग मशीन स्थापित की है। यहां दूध की हर प्रकार की जांच—फैट, एसएनएफ, पानी, मिलावट—कुछ ही मिनटों में हो जाती है। सबसे खास बात यह है कि कोई भी दुग्ध उत्पादक या उपभोक्ता अपना दूध यहां बिल्कुल मुफ्त में जांच करवा सकता है। भांभू ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ उनकी टीम ने हाल ही में मार्केट से सैंपल लेकर जांच की, जिनमें अधिकतर घी में पाम ऑयल, अन्य तेलों और केमिकल की मिलावट पाई गई। वहीं दूध में भी बड़े पैमाने पर पानी की मिलावट सामने आई है।
उरमूल डेयरी में क्वालिटी कंट्रोल संभालने वाले सेंगर ने बताया कि डेयरी में आने वाला लगभग पंचानवे प्रतिशत दूध शुद्ध गाय का होता है। शेष पांच प्रतिशत दूध में भैंस एवं अन्य पशुओं का दूध शामिल है। डेयरी की टीम लगातार गांवों में जाकर दूध की शुद्धता को लेकर जागरूकता भी फैला रही है।














