🔴 India US trade Inside Story
अमेरिका ने भारत को बड़ी ट्रेड राहत देते हुए भारी भरकम 50% टैरिफ को घटाकर महज 18% कर दिया है। यह अहम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोन बातचीत के बाद सामने आया है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की।
इस ऐलान के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी X पर पोस्ट कर राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया। लेकिन इस अचानक फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—
- डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ ट्रेड डील के लिए अचानक तैयार कैसे हो गए?
- अमेरिकी टैरिफ में इतनी बड़ी कटौती के पीछे असली वजह क्या है?
भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा— “आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। वे मेरे सबसे करीबी दोस्तों में से एक हैं और भारत के एक शक्तिशाली व सम्मानित नेता हैं।”
ट्रंप ने बताया कि बातचीत में– भारत-अमेरिका व्यापार, रूस-यूक्रेन युद्ध, और ऊर्जा खरीद जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने दावा किया कि भारत और अमेरिका (संभवतः वेनेजुएला) से ज्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप के मुताबिक, इससे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते आगे और मजबूत होंगे और दोनों नेता “काम करके दिखाने वाले लोग” हैं।
पीएम मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा— “आज राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। मेड इन इंडिया उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% करने की शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से धन्यवाद।”
पीएम मोदी ने कहा कि– जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दो सबसे बड़े लोकतंत्र साथ काम करते हैं,तो इससे दोनों देशों के लोगों को फायदा होता है। उन्होंने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए ट्रंप के नेतृत्व की तारीफ भी की।
ट्रंप अचानक नरम क्यों पड़े?
- ग्लोबल डीलमेकर की छवि: ट्रंप खुद को दुनिया का बड़ा “डीलमेकर” साबित करना चाहते हैं। भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ट्रेड डील उनके लिए राजनीतिक तौर पर फायदेमंद है।
- EU-India ट्रेड डील का दबाव: हाल ही में भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच बड़ी ट्रेड डील हुई है, जिसमें 96% से ज्यादा उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने की बात है। इससे अमेरिका पर दबाव बढ़ा कि वह भी भारत के साथ प्रतिस्पर्धी शर्तों पर समझौता करे, वरना अमेरिकी कंपनियां पीछे रह जाएंगी।
- रूस-यूक्रेन युद्ध का एंगल: ट्रंप ने इस डील को रूस-यूक्रेन युद्ध से भी जोड़ दिया है। उनका मानना है कि भारत अगर रूसी तेल कम खरीदेगा, तो रूस की आय घटेगी।

















