🔴 Bikaner Crime News
बीकानेर जिले के नोखा में एक विवाहित महिला ने अपने पिता पर बचपन से चली आ रही यौन शोषण की संगीन वारदातों का खुलासा किया है। 27 अगस्त को हुई ताजा घटना ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और पीड़िता ने नोखा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
थानाधिकारी अरविंद भारद्वाज की अगुवाई में जांच तेज हो चुकी है, जो POCSO एक्ट और बीएनएस की कई धाराओं के तहत चल रही है। यह केस न सिर्फ परिवार की इज्जत का सवाल है, बल्कि समाज में छिपी सड़ांध को उजागर करने वाला भी।
पीड़िता की उम्र महज 30 साल है, लेकिन उनके घाव 14 साल पुराने हैं। 5 अगस्त 1995 को जन्मीं इस महिला ने अपनी 8वीं कक्षा के बाद ही शादी के बंधन में बंध जाना पड़ा। मुकदमा (गौना) न होने के बावजूद, वह ससुराल चली गईं। घर में पिता रेलवे में नौकरी कर चुके थे, जो अब रिटायर्ड हैं, लेकिन शराब की लत ने उन्हें हैवान बना दिया। “पिताजी अक्सर नशे में घर लौटते और अकेली मिली बेटी पर गलत नजरें गड़ाते,” रिपोर्ट में पीड़िता ने लिखा। उन्होंने मां-भाई-बहनों को बताया भी, लेकिन जवाब मिला— “घर की इज्जत बचाओ, बाहर मत बताना।” सबसे दर्दनाक मोड़ तब आया जब वह 15-16 साल की थीं। गर्भवती होकर पीहर लौटीं, मां-भाई खेत में थे। नशे में धुत पिता घर घुसे और खेती के औजार से धमकाते हुए बलात्कार कर डाला। “जान से मार दूंगा अगर किसी को बताया,” यह धमकी सालों तक उनके गले में अटकी रही। शाम को परिवार लौटा तो स्तब्ध रह गया, लेकिन पिता को जगाकर सिर्फ बुरा-भला कहा। बच्चे के जन्म तक सबने निगरानी रखी, फिर वह ससुराल लौट गईं। उसके बाद पीहर के चंद दौरे ही हुए, जहां पिता से दूरी बनाए रखी।
वक्त बीता, पीड़िता ने पति के साथ अलग मकान में खुशहाल जिंदगी बुन ली। पड़ोस में बहन रहती हैं, पिता शहर की कॉलोनी में। लेकिन 27 अगस्त 2025 को सुबह 10:30-11 बजे अकेली रहते हुए वही काला साया लौट आया। नशे में चूर पिता घर में घुस आए और जोर-जबरदस्ती शुरू कर दी। चीखने-चिल्लाने पर पति लौटे, बीच-बचाव किया और पिता को धक्के देकर बाहर फेंक दिया। बहन को फोन पर बताया तो जवाब आया— “वो तो वैसा ही है।” यह पहली बार नहीं था। इससे पहले भी एक-दो मौकों पर पिता ने अकेले में शोषण की कोशिश की। गंगाशहर थाने में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने से हौसला बढ़ा। आखिरकार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय से डाक भेजकर नोखा थाने में केस दर्ज हुआ। धाराएं: बीएनएस 115(2), 127(2), 64(2)(F), 64(2)(M), 3/4(2), 5(L)(N)/6, साथ ही POCSO एक्ट।
यह केस सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज का आईना है। घरेलू हिंसा, यौन शोषण के मामलों में 90% पीड़िताएं चुप रहती हैं—इज्जत के नाम पर। विशेषज्ञों का कहना है कि POCSO जैसे कानून मजबूत हैं, लेकिन जागरूकता और त्वरित कार्रवाई की कमी से अपराधी बुलंद होते जाते हैं। नोखा पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षा का भरोसा दिया है।














