🔴 Bikaner Congress News
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत बीकानेर जिले में राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। शहर और देहात दोनों स्तरों पर जिलाध्यक्ष पद के लिए आवेदनों की भरमार हो गई है। राहुल गांधी के निर्देशानुसार चलाया जा रहा यह अभियान संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त करने और आम कार्यकर्ता को नेतृत्व में भागीदारी दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
बीकानेर में यह प्रक्रिया दशहरे के बाद तेजी से शुरू हुई और आज कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व बीकानेर जिला प्रभारी राजेश लिलोठिया ने दावेदारों से विस्तृत चर्चा की। इस दौरान शहर और देहात जिलाध्यक्ष पद के लिए कुल 80 से अधिक नामों ने दावेदारी पेश की, जो कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह और प्रतिस्पर्धा दोनों को दर्शाता है।
शहर जिलाध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार
यशपाल गहलोत, अनिल कल्ला, मोहम्मद हारून राठौड़, अरविन्द मिढ़ा, मक़सूद अहमद, अरुण व्यास, गजेन्द्रसिंह सांखला, आजम अली, सुमित कोचर, साजिद सुलेमानी, इकबाल मलवान, शर्मिला पंचारिया, नितिन वत्सस, मदन गोपाल मेघवाल, किशन तंवर, दुलीचंद गहलोत, शांतिलाल सेठिया, आंनद जोशी, ऋषि व्यास, ललित तेजस्वी, संजय आचार्य, छेलू सिंह जोधासर, रवि पुरोहित, नन्दलाल जावा, चंद्रशेखर चाँवरिया, ओमप्रकाश लोहिया, आंनद सिंह सोढा, कौशल दुग्गड, प्रहलाद सिंह मार्शल, मनोज चौधरी, जितेंद्र भाटी, मोहम्मद अली सुलेमानी, जिया उर रहमान, दिलीप बांठिया, फिरोज अहमद भाटी, श्याम तंवर, उमा सुथार, जुगल हाटीला।
देहात जिलाध्यक्ष पद के लिए जबरदस्त मुकाबला
बिशनाराम सियाग, महिपाल सारस्वत, मूलाराम भादू, मनोज सारण, गोविंदराम गोदारा, सतु खां पड़िहार, सांवरलाल बिश्नोई, रामधन मेघवाल, लतिफ खान, रामकुमार बिश्नोई, रामनिवास कुकणा, डॉ प्रीति मेघवाल, हरिराम बाना, राधेश्याम सिद्ध, लेखराम धतरवाल, सोहनलाल महिया, ओमप्रकाश मेघवाल, चेतन सिहाग, जुगल हटीला, भगवान राम सिद्ध, मुखराम धतरवाल।
इस बार के अभियान में कुछ नाम ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी दावेदारी से सभी को चौंका दिया है। जहां जिया उर रहमान की दावेदारी शहर कांग्रेस में हलचल मचा रही है, वहीं देहात कांग्रेस में महिपाल सारस्वत, हरिराम बाना और रामकुमार तेतरवाल के नाम नई चर्चाओं को जन्म दे रहे हैं। इसके उलट, जिन नेताओं के नाम पहले चर्चा में थे—जैसे पीसीसी सचिव शिवलाल गोदारा और पूर्व राज्यमंत्री लक्ष्मण कड़वासरा—उन्होंने आवेदन तक नहीं किया है। इस कारण संगठन के समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।














