Bikaner News
घरेलू जरूरतों के लिए लिए गए उधार की अदायगी न करने पर चैक बाउंस केस में बीकानेर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एनआई एक्ट के तहत विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष जयपाल की अदालत ने आरोपी मोहम्मद रमजान को दोषी ठहराते हुए 6 माह की सश्रम कारावास और ₹3.5 लाख का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 21 दिन की जेल की सजा भुगतनी होगी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
एडवोकेट पारसमल बिश्नोई के अनुसार, निकी धोबी तलाई निवासी मोहम्मद रमजान ने अपने परिचित राजेश से एक माह के लिए ₹2.5 लाख उधार लिए थे। इस रकम की वापसी के लिए रमजान ने राजेश को एक चैक दिया। लेकिन जब यह चैक बैंक में जमा किया गया, तो अकाउंट में बैलेंस न होने के कारण चैक डिशॉनर हो गया। इसके बाद राजेश ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह सख्त सजा सुनाई। पीड़ित पक्ष की ओर से मामले की पैरवी एडवोकेट पारसमल बिश्नोई ने की।
क्या है एनआई एक्ट?
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत चैक बाउंस एक दंडनीय अपराध है, जिसमें दोषी को जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।














