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बीकानेर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार पीबीएम अस्पताल में अव्यवस्थाओं का सिलसिला थमता नज़र नहीं आ रहा है। मंगलवार को अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में स्टाफ पूरी तरह नदारद मिला, जबकि टेबल पर चिपका एक साधारण-सा कागज़ मानो “राज्य आदेश” की तरह चिपका था— “सैंपल रख जाएं, रिपोर्ट अगले दिन मिलेगी।”
ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रदेश की भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार लोग ही स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार क्यों कर रहे हैं? ओर प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ताओं का कर्त्तव्य है कि, भाजपा सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इसी अव्यवस्था की शिकायत मिलते ही पूर्व भाजपा जिला उपाध्यक्ष भगवान सिंह मेड़तिया, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष वेद व्यास, भाजपा नेता विक्रम सिंह राजपुरोहित, युवा मोर्चा मीडिया संयोजक भव्य दत्त भाटी मौके पर पहुंचे। नेताओं ने लैब की स्थिति देखकर नाराज़गी ज़ाहिर की और इसे प्रशासनिक ढिलाई का जीता-जागता प्रमाण बताया।
भगवान सिंह मेड़तिया ने कड़े शब्दों में कहा— बिना स्टाफ के लैब चलाना गंभीर लापरवाही है। अगर किसी मरीज का सैंपल बदल जाए या रिपोर्ट में ग़लती हो जाए तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
वेद व्यास ने इसे अंधेरगर्दी और कुप्रबंधन का स्पष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि मरीजों की जान से जुड़े विभाग में इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जा सकती और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
मीडिया संयोजक भव्य दत्त भाटी ने भी अस्पताल प्रबंधन से जवाबदेही तय करने, स्टाफ की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और मरीजों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को तुरंत रोकने की मांग की।














