⚪ Humayun Kabir Babri Masjid Dispute West Bangal
पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा धमाका तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रख दी।
6 दिसंबर—वही तारीख जिस दिन 1992 में अयोध्या ढांचा ढहा था—को चुना जाना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। शिलान्यास कार्यक्रम में सऊदी अरब से मौलवी बुलाए गए, हजारों की भीड़ उमड़ी, और इसके बाद बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।
ममता बनर्जी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हुमायूं कबीर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया। इसके बाद कबीर ने नई पार्टी बनाने और ओवैसी की AIMIM के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया — यानी 2025–26 के चुनावों में मुस्लिम वोट बैंक एक नए मोड़ पर खड़ा हो सकता है।
हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर
- हुमायूं कबीर ने अपनी राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी।
- 2012: कांग्रेस छोड़कर TMC में शामिल
- ममता सरकार में मंत्री बने
- 2015: पार्टी विरोधी गतिविधियों पर TMC से निष्कासित
- 2016: निर्दलीय लड़े, हार गए
- 2018: BJP में शामिल
- 2019: मुर्शिदाबाद से BJP सांसद प्रत्याशी — तीसरे स्थान पर
- 2020: फिर TMC में वापसी
- 2021: TMC से भरतपुर के विधायक बने
- 2025: AIMIM के साथ नए राजनीतिक अध्याय का ऐलान
कह सकते हैं कि हुमायूं कबीर उन नेताओं में से हैं जिनकी राजनीति में हर दल की झलक मिल जाती है।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कबीर ने हिंदू समुदाय को लेकर बेहद विवादित बयान दिया था। “अगर मैं आपको दो घंटे में भागीरथी में नहीं डुबोऊं, तो राजनीति छोड़ दूंगा। आप 30%, हम 70% हैं।” उनके इस बयान पर BJP ने जबरदस्त हमला बोला था। यह बयान आज भी बंगाल की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दे की तरह मौजूद है।
अब BJP इसे “मुस्लिम वोट बैंक के लिए खतरनाक राजनीति” बता रही है, तो TMC इसे “पार्टी विरोधी गतिविधि” बताकर कबीर से दूरी बना रही है।


















