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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की सेहत पर बड़ा खुलासा, मेडिकल लापरवाही का आरोप…

🟡 Pakistan Former Prime Minister Imran Khan

पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अदियाला जेल से आई एक रिपोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी सलमान सफदर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जेल में लंबे समय से एकांत कारावास (Solitary Confinement) में रखे जाने और समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण इमरान खान की दाहिनी आंख की लगभग 85% रोशनी प्रभावित हो चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, 73 वर्षीय इमरान खान पिछले दो साल चार महीने से अदियाला जेल में बंद हैं। इस दौरान उन्हें पर्याप्त मेडिकल जांच और इलाज उपलब्ध नहीं कराया गया। दस्तावेज में उल्लेख है कि उनकी आंखों में लगातार पानी आना और धुंधलापन बढ़ना गंभीर संकेत थे, लेकिन कथित तौर पर समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच नहीं करवाई गई।खान ने कथित तौर पर बताया कि अक्टूबर 2025 तक उनकी आंखों की दृष्टि सामान्य (6×6) थी, लेकिन बाद में अचानक समस्या शुरू हुई। समय पर इलाज न मिलने से दाहिनी आंख में ब्लड क्लॉट बनने और नसों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब उस आंख में सिर्फ 15% विजन शेष है।

स्लो पॉइजन जैसी स्थिति का आरोप

रिपोर्ट में जेल की परिस्थितियों को बेहद कठोर बताया गया है। कहा गया है कि इमरान खान को 24 घंटे अकेले रखा गया, नियमित ब्लड टेस्ट या अन्य स्वास्थ्य जांच नहीं हुई। इसे “धीरे-धीरे तोड़ने की रणनीति” जैसा बताया गया है।

परिवार और वकीलों से सीमित संपर्क

दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि इमरान खान को 2025 के दौरान अपने बेटों से सिर्फ दो बार फोन पर बात करने की अनुमति मिली। वकीलों और परिवार से मुलाकात पर भी सख्त निगरानी रही। हालांकि, हाल ही में जेल प्रशासन में बदलाव के बाद उन्हें सप्ताह में एक बार पत्नी बुशरा बीबी से 30 मिनट की मुलाकात की अनुमति दी गई है।

मेडिकल बेल की तैयारी

इमरान खान की लीगल टीम अब उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर मेडिकल बेल (Medical Bail) के लिए नई याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है। सलमान सफदर ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा जांच नहीं कराई गई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

कुछ मानवाधिकार संगठनों ने पूर्व प्रधानमंत्री को पर्याप्त चिकित्सा और कानूनी सहायता से वंचित रखने को अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ बताया है। अब नजर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है कि वह इस रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।



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