⚪ Bikaner PBM Hospital News
बीकानेर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीबीएम हॉस्पिटल में एक बार फिर चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। मामला जनाना अस्पताल का है, जहाँ डॉ. संतोष खजोटिया की यूनिट पर इलाज में भारी चूक के आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बीकानेर निवासी एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे 19 दिसंबर को पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला का इलाज डॉ. संतोष खजोटिया के अधीन चल रहा था। उस समय डॉक्टर द्वारा सोनोग्राफी और ब्लड जांच करवाई गई, जिसके बाद रिपोर्ट में कथित गड़बड़ी बताकर परिजनों को तत्काल सर्जरी की सलाह दी गई। महिला की जान को खतरा बताते हुए परिजनों ने सर्जरी की सहमति दी। इसके बाद डॉक्टर द्वारा महिला की 25 टांकों वाली सर्जरी की गई। कुछ दिन अस्पताल में रखने के बाद महिला को छुट्टी दे दी गई।
लेकिन 4 जनवरी 2026 को महिला की तबीयत एक बार फिर गंभीर हो गई। उसे दुबारा पीबीएम अस्पताल लाया गया। इस बार फिर सोनोग्राफी करवाई गई, जिसमें डॉक्टर द्वारा परिजनों को बताया गया कि महिला के पेट में एक और भ्रूण मौजूद है। यह सुनते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया। उनका आरोप है कि यदि महिला के पेट में जुड़वां भ्रूण थे, तो 19 दिसंबर की सोनोग्राफी में यह बात सामने क्यों नहीं आई?परिजनों ने सवाल उठाया कि 15 दिनों तक दूसरा भ्रूण पेट में रहने से यदि महिला की जान को कोई खतरा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? परिजनों का यह भी आरोप है कि फिलहाल महिला को अस्पताल में भर्ती तो किया गया है, लेकिन कोई ठोस इलाज शुरू नहीं किया गया, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष वेद व्यास, जसराज सिंवर, विक्रम सिंह राजपुरोहित और भव्यदत्त भाटी तुरंत इस विषय पर संज्ञान लिया। ओर वेद व्यास द्वारा जब डॉ. संतोष खजोटिया से फोन पर बातचीत की गई, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का आरोप है और कॉल काट दी गई।
इसके बाद डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया ने पीबीएम प्रिंसिपल डॉ. सुरेन्द्र वर्मा से बात कर पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि, 15 दिनों में दो बार सर्जरी की स्थिति कैसे बन सकती है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दोषी डॉक्टर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और मरीज को उचित व बेहतर इलाज दिलाने की मांग की।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर पीबीएम अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।















