Bikaner News Today
बीकानेर संभाग की सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के बच्चा वार्डों की हालत इन दिनों बेहद चिंताजनक है। अस्पताल प्रशासन के तमाम दावों और सख्त निर्देशों के बावजूद बच्चा वार्ड गर्मी और उमस से तप रहा है। जिन मासूमों को राहत और इलाज मिलना चाहिए, वे पसीने में भीगकर तिलमिलाते नजर आ रहे हैं।
बंद पड़े एसी, ना राहत ना आराम
अस्पताल के अधिकांश वार्डों में लगे एयर कंडीशनर लंबे समय से बंद पड़े हैं। कुछ वार्डों में एसी की जगह सिर्फ दीवार पर लगे निशान नजर आते हैं, यानी एसी हटाए जा चुके हैं – लेकिन ये AC कहां गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं। वहीं, जहां एसी हैं भी, वो चालू नहीं किए जा रहे।
कूलर भी बने Showpiece – खिड़कियां सील
प्रशासन का दावा है कि वार्डों में कूलर लगाए गए हैं, लेकिन गर्म हवा और कांच बंद खिड़कियों के चलते ये कूलर भी किसी काम के नहीं हैं। अस्पताल में सुरक्षा के नाम पर खिड़कियों पर कांच की परमानेंट सीलिंग कर दी गई है, जिससे न ताजी हवा आ सकती है, न कूलर की हवा बाहर जा सकती है। इससे वार्डों में उमस और भी ज्यादा बढ़ रही है।
खुद लाने पड़ रहे पंखे
जब उमस से मासूम बच्चे रोने-चिल्लाने लगते हैं, तो उनके परिजनों को उन्हें वार्ड से बाहर खुले में ले जाना पड़ता है। कुछ परिजन तो अपने घरों से टेबल फैन तक लेकर आ रहे हैं, ताकि अपने बच्चे को गर्मी से थोड़ा आराम दिला सकें।
भाजपा नेता भव्य दत्त भाटी ने कहा, पीबीएम अस्पताल प्रशासन सिर्फ फाइलों में व्यवस्थाएं दिखा रहा है। जबकि जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है।
बता दे, कई वार्डों में AC पूरी तरह बंद मिले। कुछ जगहों पर पुराने एसी गायब थे। कुछ कर्मचारीयो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, खिड़कियों को बंद करना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि खुले रास्तों से जहरीले जीव-जंतु आ सकते हैं – लेकिन सवाल उठता है कि क्या इस डर से बच्चों को तपते हाल में छोड़ देना तर्कसंगत है?














