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राजस्थान की राजनीति में मंगलवार सुबह बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के भाजपा छोड़ते ही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सुबह 9 बजे शुरू हुई ACB की कार्रवाई
जयपुर से आई ACB की टीम ने बांसवाड़ा जिले के कलिंजरा क्षेत्र स्थित भैरवजी कृपा फिलिंग स्टेशन, बागीदौरा स्थित भैरवजी फिलिंग स्टेशन, और मोटी टिम्बी स्थित क्रशर प्लांटपर दस्तावेजों की गहन जांच की। दोनों पेट्रोल पंप महेंद्रजीत मालवीया के नाम पर दर्ज हैं, जबकि क्रशर प्लांट उनके पुत्र प्रेम प्रताप सिंह के स्वामित्व में बताया गया है।
ACB टीम ने पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर
जमीन के कागजात, बैंक व लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड, स्टाफ की जानकारी की बारीकी से जांच की। बागीदौरा पेट्रोल पंप पर टीम को मैनेजर रामगोविंद के आने तक करीब एक घंटे इंतजार करना पड़ा। बाद में उनसे विस्तृत पूछताछ की गई। रामगोविंद ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से पंप पर कार्यरत हैं।
इधर, पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया जयपुर रवाना हो चुके थे, लेकिन रास्ते में ही उन्हें ACB रेड की सूचना मिली। वे पालोदा तक पहुंचने के बाद तुरंत बांसवाड़ा स्थित अपने आवास लौट आए।
मालवीया ने कहा— अगर मैं वापस नहीं आता तो लोग कहते कि मैं भाग गया। ACB ने मुझसे कोई पूछताछ नहीं की। यह दबाव बनाने की कार्रवाई है, ऐसा नहीं होना चाहिए।
48 घंटे में बदली सियासत
गौरतलब है कि, महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने 23 महीने पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी, लेकिन भाजपा में उन्हें कोई बड़ा पद नहीं मिला।रविवार को जयपुर में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद उन्होंने कांग्रेस में वापसी का ऐलान किया और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र सौंपा। इसके महज 48 घंटे के भीतर ACB की रेड ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा सियासी रंग दे दिया है।
लोकसभा चुनाव में हार और भाजपा में उपेक्षा के बाद मालवीया अब पंचायत राज चुनाव के जरिए वागड़ क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। ऐसे में ACB की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है।














