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2026 का राजस्थान कैलेंडर जारी, छुट्टियों के साथ संस्कृति और गौरव की झलक…

🔴 Rajasthan Calendar 2026

राजस्थान सरकार ने वर्ष 2026 का राजकीय कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर में पूरे वर्ष के लिए कुल 30 राजकीय एवं सार्वजनिक अवकाश घोषित किए गए हैं। यह कैलेंडर न केवल शासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और बैंकों के लिए मार्गदर्शक होगा, बल्कि आमजन की वार्षिक कार्य-योजना बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा।

राजकीय कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 में प्रमुख अवकाश इस प्रकार रहेंगे—

26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 18 फरवरी (महाशिवरात्रि), 4 मार्च (होली), 26 मार्च (राम नवमी), 2 अप्रैल (महावीर जयंती), 4 मई (बुद्ध पूर्णिमा), 21 अप्रैल (ईद-उल-फितर), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 14 अगस्त (जन्माष्टमी), 2 अक्टूबर (गांधी जयंती), 20 अक्टूबर (दशहरा), 9 नवंबर (दीपावली), 10 नवंबर (गोवर्धन पूजा), 11 नवंबर (भैया दूज), 24 नवंबर (गुरु नानक जयंती) और 25 दिसंबर (क्रिसमस) सहित अन्य अधिसूचित अवकाश शामिल हैं।

इस वर्ष का राजकीय कैलेंडर केवल अवकाशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य के हर जिले की सांस्कृतिक विरासत, कृषि, शिल्प, पर्यटन और प्राकृतिक वैभव को थीम आधारित रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • जनवरी: एक जिला-एक खेल थीम के तहत अजमेर की पारंपरिक कबड्डी, संदेश – “स्वस्थ तन-मन, समृद्ध हर क्षण”
  • फरवरी: टोंक की सरसों की फसल, संदेश – “पीली सरसों मुस्काए, वासंती खुशबू छाए”
  • मार्च: झुंझुनू का काष्ठ हस्तशिल्प, संदेश – “संस्कृति की अमिट निशानी”
  • अप्रैल: ब्यावर का गेहूं, पंच गौरव-उपज ब्रांडिंग
  • मई: दौसा के पत्थर उत्पाद, संदेश – “श्रम का जहाँ मान”
  • जून: बीकानेर का रोहिड़ा वृक्ष, पर्यावरण संरक्षण का संदेश
  • जुलाई: बीकानेर की मोठ फसल, कृषि समृद्धि का प्रतीक
  • अगस्त: जैसलमेर का सोनार दुर्ग, पर्यटन को बढ़ावा
  • सितंबर: डीग महल, बिना बिजली से संचालित फव्वारों की अनूठी विरासत
  • अक्टूबर: जालोर की सुंधा माता, लोक आस्था का केंद्र
  • नवंबर: यूनेस्को विश्व धरोहर आमेर दुर्ग, शौर्य और इतिहास की पहचान
  • दिसंबर: अजमेर-पुष्कर के गुलाब, वैश्विक बाजार में पहचान

वर्ष 2026 का यह राजकीय कैलेंडर न केवल अवकाशों की जानकारी देता है, बल्कि राजस्थान की परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर, उन्नत तकनीक, खेती-किसानी और पर्यटन को एक ही मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। यह कैलेंडर प्रदेश की विविधता और गौरवशाली पहचान का जीवंत दस्तावेज बनकर सामने आया है।



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