⚫ Ram Rahim Acquitted
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा के चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। करीब सात साल पहले विशेष सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए राम रहीम को इस मामले में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि डेरा प्रमुख के खिलाफ लगाए गए आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं हो पाए, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ दिया जाता है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में अन्य तीन दोषियों—कुलदीप, निर्मल सिंह और किशन लाल—की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इन सभी को सीबीआई अदालत ने पत्रकार की हत्या की साजिश और हत्या में शामिल होने का दोषी माना था। हालांकि राम रहीम को इस मामले में राहत मिल गई है, लेकिन वह फिलहाल जेल में ही रहेगा। दरअसल, वह दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है और रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।
यह मामला अक्टूबर 2002 का है, जब सिरसा में अपना अखबार ‘पूरा सच’ चलाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई थी।
छत्रपति अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादों और आरोपों को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहे थे। इनमें एक गुमनाम पत्र भी शामिल था, जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस खुलासे के बाद मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था और बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
हाईकोर्ट के फैसले पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। अंशुल ने कहा, “हमारी लड़ाई डेरा प्रमुख के खिलाफ थी। अगर मुख्य आरोपी को ही बरी कर दिया गया है तो यह हमारे लिए बड़ा झटका है। लेकिन हम हार नहीं मानेंगे और न्याय के लिए अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।”
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट में क्या कदम उठाता है और इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या कानूनी मोड़ आता है।


















