🟡 Horse Rider Jethmal Bhati
दिल्ली रेसकोर्स तक बीकानेर का परचम लहराने वाले प्रसिद्ध घुड़सवार एवं पारंपरिक हड्डी रोग विशेषज्ञ जेठमल भाटी का मंगलवार को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल जगत में शोक की लहर है।

अस्सी के दशक में जेठमल भाटी उस दौर के एकमात्र ऐसे घुड़सवार थे जिन्होंने दिल्ली रेसकोर्स में घोड़े दौड़ाकर बीकानेर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका साहस, संतुलन और आत्मविश्वास युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।
स्व. भाटी हड्डी रोगों के पारंपरिक उपचार में विलक्षण दक्षता रखते थे। बच्चों की कॉलर बोन (हसली), मोच और वर्षों पुराने दर्द का उपचार वे अपने अनुभव और स्नेहिल स्पर्श से करते थे। प्रतिदिन 40-50 मरीजों को नि:शुल्क देखना उनके जीवन का नियमित संकल्प था। दूर-दराज़ से लोग उनके पास उपचार के लिए आते और स्वस्थ होकर लौटते थे।
सिर्फ खेल और समाजसेवा ही नहीं, बल्कि कला जगत में भी उनका विशेष स्थान था। मात्र 8 वर्ष की आयु में उन्होंने पारंपरिक रम्मत में ‘राजा हरिश्चंद्र’ की भूमिका निभाकर अभिनय यात्रा शुरू की। उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और सशक्त अभिनय ने उन्हें प्रदेशभर में विशिष्ट पहचान दिलाई।
नत्थूसर बास निवासी जेठमल भाटी का जीवन सेवा, साहस और संस्कारों का अद्भुत संगम था। वे पीड़ित मानवता के सच्चे संरक्षक और प्रकृति उपासक के रूप में भी जाने जाते थे। उल्लेखनीय है कि जेठमल भाटी कम्यूनिटी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष कन्हैयालाल भाटी के पिता थे।














