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पश्चिमी राजस्थान में राजस्व मुद्दों की गूंज, अंशुमान ने विधानसभा में उठाए बड़े सवाल…

⚫ MLA Anshuman Singh Bhati

कोलायत से विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने राजस्थान विधानसभा में राजस्व से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाते हुए पश्चिमी राजस्थान की जमीनी समस्याओं को केंद्र में ला दिया। मांग संख्या 16 (राजस्व) पर चर्चा के दौरान भाटी ने मरुस्थलीय क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप प्रशासनिक सुधारों की जरूरत बताई।

भाटी ने गिराजसर में नई तहसील और बज्जू के गोकुल में उप-तहसील कार्यालय खोलने की मांग रखी। उनका कहना था कि दूरस्थ इलाकों के लोगों को राजस्व कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। कोलायत क्षेत्र में कथित अनियमित भूमि आवंटन को लेकर भाटी ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि करीब 285 मामलों में 7500 बीघा जमीन पर कार्रवाई लंबित है। उन्होंने पूर्व में हुई गड़बड़ियों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

भाटी ने कपिल सरोवर के जलग्रहण क्षेत्र में नियमों के विरुद्ध किए गए भूमि आवंटन को तुरंत निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण में लापरवाही भविष्य के लिए खतरा बन सकती है। मरुस्थल की जीवनरेखा माने जाने वाले खेजड़ी पेड़ों के संरक्षण पर जोर देते हुए भाटी ने सोलर प्रोजेक्ट क्षेत्रों में खसरा वार जियो टैगिंग लागू करने का सुझाव दिया, ताकि पेड़ों की सटीक गणना और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि जिस तरह बड़ी कंपनियों को हजारों बीघा भूमि दी जाती है, उसी तरह भूमिहीन किसानों को भी प्राथमिकता के आधार पर भूमि आवंटन किया जाना चाहिए। पश्चिमी राजस्थान में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भाटी ने 25% भूमि को गोचर, ओरण और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा। उनका मानना है कि यह कदम भविष्य में भूमि संकट से बचाने में मदद करेगा।

भाटी ने स्मॉल और मीडियम पैच आवंटन पर लगी रोक हटाने तथा सीलिंग एरिया नियमों में संशोधन की मांग की, ताकि वर्षों से लंबित मामलों का समाधान हो सके और किसानों को राहत मिले।



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