🔴 RSS Sun Salutation Statement
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के एक बयान ने देश की सियासत और धार्मिक विमर्श में नई बहस छेड़ दी है। गोरखपुर में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन के दौरान होसबाले द्वारा मुसलमानों को सूर्य नमस्कार करने की सलाह देने के बाद मुस्लिम संगठनों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस बयान पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने तीखी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे इस्लाम की मूल मान्यताओं और भारत की बहुलतावादी संस्कृति की गलत व्याख्या करार दिया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने RSS नेता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, भारत में हिंदू और मुस्लिम सदियों से आपसी सौहार्द के साथ रहते आए हैं, लेकिन इस्लाम की बुनियादी मान्यताओं से समझौता संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम की नींव तौहीद यानी केवल एक ईश्वर की उपासना पर टिकी है और किसी भी प्रकार की पूजा को उससे जोड़ना इस्लामी सिद्धांतों के विरुद्ध है। मौलाना मदनी ने कहा कि इस सच्चाई से थोड़ा सा भी विचलन व्यक्ति को इस्लाम के दायरे से बाहर कर देता है।
मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि, इस्लाम प्रकृति से प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और संतुलन की शिक्षा देता है, लेकिन इसे पूजा से जोड़ना एक गंभीर वैचारिक भूल है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS महासचिव ने इस्लामी मान्यताओं को समझने में गंभीरता नहीं दिखाई। अपने बयान में मौलाना मदनी ने पूर्व RSS प्रमुख के.एस. सुदर्शन के साथ हुए संवाद का हवाला देते हुए कहा कि जमीयत आज भी सार्थक, ईमानदार और सम्मानजनक बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने दोहराया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद वर्षों से सांप्रदायिक सौहार्द, संवाद और आपसी सम्मान के लिए कार्य करती आ रही है।
RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने गोरखपुर में कहा था कि, सूर्य नमस्कार एक वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक व्यायाम है और इससे मुसलमानों का कुछ भी नुकसान नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम भाई सूर्य नमस्कार करें या पर्यावरण संरक्षण के लिए नदी की पूजा करें तो इसमें गलत क्या है?
इस बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं के बाद एक बार फिर देश में धार्मिक सहिष्णुता, आस्था की सीमाएं और आपसी सम्मान को लेकर बहस तेज़ हो गई है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

















