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बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन ने पकड़ा उग्र रूप…

🔴 Khejari Bachao Mahapadav Bikaner

बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार को हुए महापड़ाव के बाद देर रात प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के पास स्थित बलने बिश्नोई धर्मशाला में दोबारा महापड़ाव शुरू कर दिया। यहां समाज के 363 संतों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, जिससे आंदोलन और तेज हो गया है। धरने पर बैठे संतों और समाज के लोगों ने आंखों पर पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया है। संतों के साथ बड़ी संख्या में भक्तों ने भोजन त्यागने का संकल्प लिया है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

सोमवार देर रात प्रदर्शनकारियों ने पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर को खाली किया। इसके बाद लोग पैदल और वाहनों से कलेक्ट्रेट परिसर की ओर रवाना हुए। कुछ प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की ओर आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें वहीं रोक दिया। इस आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में महिलाएं अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी हैं। उन्होंने पारंपरिक परिधान और आभूषण पहनकर अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ आंदोलन को समर्थन दिया।

प्रशासन का आश्वासन, लेकिन नहीं मानी बात

सोमवार को महापड़ाव के दौरान कलेक्टर नम्रता वृष्णि और एसपी कावेंद्र सागर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि बीकानेर में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई नहीं होने दी जाएगी। प्रशासन धरना समाप्त करवाना चाहता था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मंच से उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद संतों के नेतृत्व में आमरण अनशन की घोषणा कर दी गई।

बिश्नोई धर्मशाला की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। टू-व्हीलर को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। पब्लिक पार्क के सभी प्रवेश मार्गों पर पुलिस तैनात है और यहां केवल दुपहिया वाहनों को ही अनुमति दी जा रही है। पुलिस अधिकारी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं।



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