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राजस्थान में विधायक निधि कोष के उपयोग के नाम पर कथित कमीशनखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने गंभीर अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए करौली के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक शिक्षा) पुष्पेंद्र कुमार शर्मा को पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO) में डाल दिया है, जबकि नागौर जिले के मूंडवा के एसीबीईओ कैलाशराम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सोमवार देर शाम इस संबंध में आदेश जारी किए। आदेशों के अनुसार, करौली के डीईओ पुष्पेंद्र कुमार शर्मा का मुख्यालय अब बीकानेर स्थित निदेशालय रहेगा, वहीं निलंबित एसीबीईओ कैलाशराम का मुख्यालय बाड़मेर निर्धारित किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, विधायक निधि से स्वीकृत कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी करने के बदले दोनों अधिकारियों पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप लगे हैं। शिकायत सामने आते ही राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद शिक्षा निदेशालय ने सोमवार शाम करीब साढ़े छह बजे आदेश जारी कर दिए।
लेटर के नाम पर ‘डील’ का आरोप
मामले में आरोप है कि रूरु्र डांगा और जाटव के पत्रों के आधार पर काम कराने के एवज में हिस्सा मांगा गया। कथित तौर पर अधिकारियों ने कहा—“जो कहोगे, लिख देंगे”, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजस्थान में बढ़ती सख्ती
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप है। सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत हैं कि कमीशनखोरी और अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने और और भी खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
















