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एक बेबाक राजनेता का अंत, जिसने सत्ता से सवाल पूछना नहीं छोड़ा…

Satyapal Malik

देश की राजनीति के एक अहम स्तंभ, पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का आज निधन हो गया। 76 वर्षीय मलिक दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में लंबे समय से भर्ती थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एक समय भाजपा सरकार के करीबी माने जाने वाले मलिक, अपने अंतिम वर्षों में सत्ता से टकराते नजर आए।

छात्र आंदोलन से राज्यपाल पद तक

सत्यपाल मलिक का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ और वे समाजवादी विचारधारा के प्रखर प्रवक्ता रहे। उन्हें चौधरी चरण सिंह का शिष्य माना जाता था। अपने लंबे करियर में उन्होंने लोकसभा सांसद, राज्यसभा सदस्य और बाद में जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय के राज्यपाल जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी निभाई।

भाजपा से जुड़े, पर सरकार के आलोचक बने

हाल के वर्षों में सत्यपाल मलिक अक्सर मोदी सरकार की आलोचना करते नजर आए। उन्होंने खुलकर कृषि कानूनों का विरोध किया और किसान आंदोलन के समर्थन में कई राज्यों का दौरा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधी टिप्पणी कर सियासी हलकों में हलचल मचा दी थी। उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट से निधन की पुष्टि की गई है। आखिरी बार उनके निजी सहायक ने 9 जुलाई को उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर जानकारी साझा की थी। तब से ही उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था।

भ्रष्टाचार पर उठाई थी आवाज

राज्यपाल रहते हुए भी सत्यपाल मलिक ने कई बार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी, खासकर जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कथित घोटालों का ज़िक्र कर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।


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