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जय नारायण व्यास इतिहास विभाग द्वारा 7, 8 और 9 मार्च को तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य विषय “राजस्थान में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का ऐतिहासिक अवलोकन: परम्परा से समस्या तक” रखा गया। सेमिनार में देश-विदेश के कई शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने भाग लेकर अपने शोध प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर बीकानेर के विद्वान डॉ. जगदीश नारायण ओझा ने “राजस्थान में नशा मुक्ति अभियान” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। अपने पत्रवाचन में उन्होंने राजस्थान में नशीले पदार्थों के ऐतिहासिक संदर्भ, सामाजिक प्रभाव और वर्तमान समय में नशा मुक्ति के लिए चलाए जा रहे अभियानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. ओझा ने बताया कि समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को बेहद आवश्यक बताया।

सेमिनार के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए नशे की समस्या के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य शोध और संवाद के माध्यम से नशे के दुरुपयोग की समस्या को समझना तथा इसके समाधान की दिशा में प्रभावी पहल करना रहा।















