Bikaner Monsoon 2025
लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार बीकानेर में मानसून की दस्तक हुई और रविवार की सुबह से ही जमकर बारिश ने शहर को भिगो दिया। एक ओर जहां भीषण गर्मी से राहत मिलते ही आमजन के चेहरे खिल उठे, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद और प्रशासन की तैयारियों की पोल पहली ही बारिश ने खोलकर रख दी।

शहरवासियों ने बारिश का खुले दिल से स्वागत किया। छतों से लेकर गलियों तक, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक – हर कोई इस भीगते मौसम का लुत्फ उठाता दिखा। लेकिन ये खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई।

बारिश बनी मुसीबत – निकासी व्यवस्था ने छोड़ा साथ
बारिश के रुकने के बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति बनी रही। कलेक्ट्रेट परिसर, नगर निगम रोड, पुरानी गिन्नाणी, सुरसागर क्षेत्र, गंगानगर चौराहा, एमएस कॉलेज मार्ग जैसे अहम हिस्सों में पानी ही पानी नजर आया। ट्रैफिक जाम की स्थिति यह रही कि वाहन रेंग-रेंग कर चलने को मजबूर रहे।

प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल
हर साल की तरह इस बार भी मानसून से पहले शहर में सफाई, नालों की सफाई और जलनिकासी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन पहली ही बारिश ने इन दावों की हकीकत उजागर कर दी। बारिश के घंटों बाद तक भी न तो पंपिंग की व्यवस्था दिखी, न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नजर आए। स्थानीय लोगों को खुद अपने स्तर पर पानी निकालने की कोशिश करते देखा गया। सोशल मीडिया पर भी शहर के हालात को लेकर नाराजगी देखने को मिली।

सवाल उठता है कि अगर प्रशासन को पहले से ज्ञात है कि हर वर्ष किन-किन क्षेत्रों में पानी भरता है, तो फिर उसी पैटर्न पर साल-दर-साल योजना क्यों नहीं बनाई जाती? सिर्फ कागजों पर की गई तैयारी और इमरजेंसी के बाद किया गया निरीक्षण आखिर किस काम का?















